What is GST? All the details in hindi




दोस्तो बीते कुछ दिनों से टैक्स के क्षेत्र मे एक नया शब्द सामने आया है जिसे GST कहा जा रहा आइये जानते है क्या है ये GST और कैसे हम इसका भुगतान कर पाएंगे ।

GST क्या है ?

दोस्तो जीएसटी मतलब GOODS & Service Tax इसका अर्थ ये हुआ की इसके तहत वस्तुओ और सेवाओ पर एक समान टैक्स लगाया जाता है जिस राज्य मे जीएसटी लागू होगी वहाँ आपको वस्तुओ और सेवाओ के लिए एक समान टैक्स देना होगा और जहां लागू नहीं होगी वहाँ सभी वस्तुओ और सेवाओ के टैक्स अलग अलग होंगे । दूसरे शब्दो मे आप कह सकते है की अगर पूरे देश मे यह लागू हो जाती है तो आपको वैट एक्साइज और सर्विस टैक्स जैसे करों की जगह सिर्फ एक ही टैक्स लगेगा जिसे GST कहा जाएगा ।

कब से देना होगा जीएसटी कर ?

राज्यसभा ने अप्रेल 2017 मे इसे मंजूरी दे दी है लोकसभा से इसे मार्च 2017  मे ही मंजूरी मिल चुकी थी इसलिए अगले 1 जुलाई तक पूरे भारत मे लागू करने की संभावना बताई जा रही है और सभी राज्यो को सरकार को जीएसटी लागू करने की हिदायत दे दी गई है ।


कितना देना होगा जीएसटी कर ?

वित्त मंत्री अरुण जेटली के अनुसार कुछ पदार्थ ऐसे भी है जिनमे शून्य कर लगता है और जीएसटी लागू होने के बाद भी शून्य कर ही लगेगा वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी परिषद ने विचार विमर्श के बाद जीएसटी व्यवस्था में 0, 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत की दरें तय की हैं. लक्जरी कारों, बोतल बंद वातित पेयों, तंबाकू उत्पाद जैसी अहितकर वस्तुओं एवं कोयला जैसी पर्यावरण से जुड़ी सामग्री पर इसके ऊपर अतिरिक्त उपकर भी लगाने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि 28 प्रतिशत से अधिक लगने वाला उपकर (सेस) मुआवजा कोष में जायेगा और जिन राज्यों को नुकसान हो रहा है, उन्हें इसमें से राशि दी जायेगी. ऐसा भी सुझाव आया कि इसे कर के रूप में लगाया जाए. लेकिन कर के रूप में लगाने से उपभोक्ताओं पर प्रभाव पड़ता. बहरहाल, उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त कर नहीं लगाया जायेगा.
जेटली ने कहा कि मुआवजा उन राज्यों को दिया जायेगा जिन्हें जीएसटी प्रणाली लागू होने से नुकसान हो रहा हो. यह आरंभ के पांच वर्षों के लिए होगा.

कौन सा क्षेत्र जीएसटी कर से बाहर रहेगा ?

जीएसटी में रीयल इस्टेट क्षेत्र को शामिल नहीं किया गया है इस पर स्पष्टीकरण देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें राज्यों को काफी राजस्व मिलता है. इसमें रजिस्ट्री तथा अन्य शुल्कों से राज्यों की आय होती है इसलिए राज्यों की राय के आधार पर इसे जीएसटी में शामिल नहीं किया गया है.
वित्त मंत्री ने कहा कि रियल इस्टेट की तरह ही स्थिति शराब और पेट्रोलियम उत्पादों के संबंध में भी थी. राज्यों के साथ चर्चा के बाद पेट्रोलियम पदार्थों को इसके दायरे में लाया गया है लेकिन इसे अभी शून्य दर के तहत रखा गया है. इस पर जीएसटी परिषद विचार करेगी. शराब अभी भी इसके दायरे से बाहर है.

बहुत सारे कर देने के बोझ से मिली मुक्ति

वित्त मंत्री ने कहा कि पहले एक व्यक्ति को व्यवसाय के लिए कई मूल्यांकन एजेंसियों के पास जाना पड़ता था. आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए उत्पाद शुल्क, सेवा कर, राज्य वैट, मनारंजन कर, प्रवेश शुल्क, लक्जरी टैक्स एवं कई अन्य कर से गुजरना पड़ता था. वित्त मंत्री कहा कि वस्तुओं और सेवरआ का देर्श म सुगम प्रवाह नहीं था. ऐसे में जीएसटी प्रणाली को आगे बढ़ाया गया. एक ऐसा कर जहां एक मूल्यांकन अधिकारी हो. अधिकतर स्व मूल्यांकन हो और ऑडिट मामलों को छोड़कर केवल सीमित मूल्यांकन हो. जेटली ने कहा कि कर के ऊपर कर लगता है जिससे मुद्रास्फीति की प्रवृत्ति बढ़ती है. इसलिए सारे देश को एक बाजार बनाने का विचार आया. यह बात आई कि सरल व्यवस्था देश के अंदर लाई जाए.

क्या जीएसटी लागू होने के बाद वस्तुए की कीमत बढ़ेगी ?

राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने जीएसटी सम्मेलन में कहा, "केंद्र व राज्य सरकार को मिलने वाला लगभग 60 फीसदी कर वस्तुओं पर लगने वाले 14 फीसदी मूल्य संवर्धित कर (वैट) तथा 12.5 फीसदी उत्पाद कर से आता है. जीएसटी के लागू होने के बाद इन वस्तुओं की कीमतों में कमी होने की संभावना है."
अधिया ने कहा कि अधिकांश सेवाओं पर मौजूदा 15 फीसदी सेवा कर की जगह जीएसटी के तहत 18 फीसदी कर लगेगा और इनमें से अधिकांश को खरीद पर इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा जिससे लगने वाले कुल कर का आंकड़ा समान रहेगा. उन्होंने कहा, "लगभग 18 फीसदी (सेवा कर) 15 फीसदी के समतुल्य हो जाएगा. सेवा कर में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी. कुछ सेवाओं के लिए कर में मामूली रूप से वृद्धि होगी.
जीएसटी लागू होने पर कंपनियों और व्यापारियों को भी फायदा होगा. सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी. जब सामान बनाने की लागत घटेगी तो इससे सामान सस्ता भी होगा।

कैसे काम करेगी जीएसटी ?

जीएसटी में तीन अंग होंगे केंद्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी और इंटीग्रेटेड जीएसटी
केंद्रीय और इंटीग्रेटेड जीएसटी केंद्र लागू करेगा जबकि राज्य जीएसटी राज्य सरकारें लागू करेंगी।

दोस्तो दूसरे शब्दो मे हम ये कह सकते है की जीएसटी के लागू होने से सामानो की कीमत पूरे देश मे एक सा होगा अगर आपने को समान दिल्ली मे 200 रुपए मे लिए तो बिहार मे भी उसकी कीमत 200 रुपए ही होंगे । 
वर्तमान मे उड़ीसा के बाद बिहार दूसरा राज्य है जीएसटी लागू करने मे बाँकी राज्यो मे अगले 1 जुलाई तक लागू हो जाएगी 


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